Thursday, December 17, 2009

महंगाई ! क्या होगा

 हर तरफ मंदी ही मंदी
हर तरफ छटनी ही छटनी
महंगाई है सुरसा मुँह बाये
क्या होगा ...

भीख का कटोरा भी
नहीं गरीबों के पास
महंगाई इतनी बढ़ी कि
धन्ना सेठों ने भी
कर ली है इसकी जमाखोरी
क्या होगा...

पुरानी बोतल मे
भरी जा रही नई शराब
सौ ग्राम की जगह
ले रहे दो सौ का दाम
क्या होगा...

नया साल है आ रहा
महंगाई मे ग्रीटिंग्स बिकेंगे कम
रेस होगा एसमएस और
दो अधर के  मिलनों के बीच
क्या होगा...

हिमांशु

Wednesday, December 16, 2009

खोखलापन

जब देखता हूँ संसार को
मन करता है छोड़ दूं
अपने इस व्यवहार को
मैं ना तो हताश हूँ
और ना ही निराश
हर पल देखता हूँ
दो पैरों वाला नर पिशाच
जो कभी भी पी लेगा खून
चूस लेगा सारी हड्डियाँ
उस मुर्गे की भांति
जिसे मालूम भी नहीं कि
बांग देने से पहले ही
या तो वह देगा ठंढ़ में
शरीर को गर्मी
या फिर उस कसाई के हाथ
दिया जाएगा बेच
जिसने उठाया है पेट के खातिर
हत्या करने का पाप

हिमांशु